Close

Animal Husbandry

पशुपालन विभाग, ऊधमसिंह नगर द्वारा संचालित स्वरोजगारपरक योजनाऐं

केन्द्र सैक्टर योजनाऐं

मत्स्य, पशुपालन एवं दुग्धविकास मंत्रालय, भारत सरकार (MFAHD GoI) द्वारा संचालित योजनाओं हेतु राज्य क्रियान्वयन इकाई का दायित्व उत्तराखण्ड पशुधन विकास परिषद (ULDB : Uttarakhand Livestock Development Board) देहरादून द्वारा निर्वहन किया जाता है। सभी जनपदों अन्तर्गत स्थापित राजकीय पशुचिकित्सालयों एवं पशु सेवा केन्द्रों द्वारा न्स्क्ठ के माध्यम से ही भारत सरकार की योजनाओं का वित्त पोषण किया जाता है।

1. पशुधन बीमा-राष्ट्रीय पशुधन मिशन (LI-NLM : National Livestock Mission-Livestock Insurance): इस योजना के तहत निविदा के माध्यम से ULDB द्वारा निर्धारित दरों पर समस्त पशुओं के बीमा प्रीमियम पर 60% से 80% अनुदान पर पशुधन बीमा किया जाता है।ULDB द्वारा सम्बन्धित बीमा कम्पनी के पक्ष में 60% से 80% बीमा प्रीमियम पर अनुदान राशि का भुगतान (जीतवनही कपतमबज ंबबवनदज जतंदेमित) किया जाता है। योजना के तहत अनुसूचित जाति/ जनजाति/ बी.पी.एल. के पशुपालकों को बीमा प्रीमियम पर 80% अनुदान तथा सामान्य जाति के पशुपालकों को बीमा प्रीमियम पर 60% अनुदान अनुमन्य है।

2. राष्ट्रीय पशुरोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP : National Animal Disease Control Program): इस योजना के तहत पशुपालन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा विभिन्न पशुरोगों (यथा; FMD (Foot & Mouth Disease), LSD (Lumpy Skin Disease), Brucella, PPR (Pestes des Petits in Ruminents), Swine Fever etc.) की रोकथाम हेतु बृहद स्तर पर पूरे देश में निःशुल्क टीकाकरण महाअभियान संचालित किया जाता है। यह योजना 100% भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित योजना है।

3. राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम (NAIP : National Artificial Insemination Program): इस योजना के तहत पशुपालन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा, कुछ निर्धारित अवधि हेतु 100ः केन्द्रीय वित्त पोषण नीति के तहत देशभर में कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम संचालित किया जाता है। विदेश से आयातित, उत्तराखण्ड सरकार एवं पशुपालन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित ।Artificial Insemination through Sex Sorted Semen (SSS) तकनीक से कृत्रिम गर्भाधान किये जाने पर 90ः से अधिक प्रकरणों में मादा संतति की उत्पादन सम्भव है। उत्तराखण्ड राज्य, देश में इस योजना को क्रियान्वित करने वाला देश का पहला प्रदेश है। यद्यपि इस तकनीक में नॉरमल सीमन स्ट्रॉ की तुलना में गर्भाधान दर कम है (Normal Semen has Average Conception Rate around 45%, Sex Sorted Semen has Average Conception Rate around 28%), किन्तु यह तकनीक, अनुत्पादक अवांछित नर बछडों को परित्यक्त किये जाने की क्रूर कुप्रथा के समाधान में लाभकारी है तथा इस तकनीक से दुग्ध उत्पादक मादा पशुओं की पशुसंख्या बृद्धि में योगदान सम्भव है। प्रान्तीय स्तर पर, ULDB द्वारा अमेरिकी संस्थाST Genetics के माध्यम से संचालित श्यामपुर ऋषिकेश लैब में सैक्स सॉर्टेड सीमन स्ट्रॉ तैयार की जा रही हैं। यह एक मंहगी तकनीक है जिसमें ST Genetics को प्रति सैक्स सॉर्टेड सीमन स्ट्रॉ हेतु रु०900/- का भुगतान किया जा रहा है। पशुपालकों को लगभग 90ः अनुदान पर रु०100/- प्रति स्ट्रॉ की दर पर SSS तकनीक से कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। पशुपालकों में सैक्स सॉर्टेड सीमन स्ट्रॉ से कृत्रिम गर्भाधान की मंहगी तकनीक, के प्रति अरुचि को दृष्टिगत करते हुए, नयी तकनीक को बढावा दिये जाने हेतु, लागत के सापेक्ष मा० मुख्यमंत्री राज्य सैक्टर के तहत Rs500/- प्रति स्ट्रॉ, जिला योजना के तहत रु०300/- प्रति स्ट्रॉ का योगदान किया जाता है। वर्तमान समय में भारत सरकार द्वारा SSS तकनीक से कृत्रिम गर्भाधान को बढावा दिये जाने हेतु जनपद के तीन विकासखण्डों (विकासखण्ड खटीमा, विकासखण्ड गदरपुर एवं विकासखण्ड बाजपुर) अन्तर्गत, ABIP (Accelerated Breed Improvement Program) के तहत रु०250/- प्रति स्ट्रॉ का केन्द्रांश योगदान प्राप्त होने के कारण, इन दो विकासखण्डों हेतु जिला योजना अंशदान के रुप में रु०50/- प्रति स्ट्रॉ का योगदान किया जाता रहा है।

राज्य सैक्टर योजनाऐं

1. मुख्यमंत्री-राज्य पशुधन मिशन (CM-SLM : Chief Minister State Livestock Mission): इस योजना का मुख्य उद्देश्य पशुधन विकास एवं पशुधन सम्बन्धी गतिविधियों हेतु संसाधनों की मांग, उपलब्धता के अन्तर का दूर करना एवं पशुपालन की गतिविधियों के सुचारू रूप से संचालन हेतु अवसंरचना विकास, सभी प्रजाति की पशुधन का सर्वागीण विकास है। योजनान्तर्गत, उद्यमिता विकास घटक में बडे पशुओं, लघु पशुओं तथा कुक्कुट विकास से सम्बन्धित योजनाओं के क्रयान्वयन हेतु बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध करावाकर, ब्याज पर 90 प्रतिशत अनुदान (90% Interest Subvention) दिया जाना है। योजनान्तर्गत लाभार्थी द्वारा लिये गये ऋण के सापेक्ष ब्याज पर 90 प्रतिशत अनुदान की अनुमन्यता अवधि 3 वर्ष है।

2. गोटवैली योजना (Goat Valley Scheme): योजना का उद्देश्य Cluster based approach अपनाते हुए लगभग 30 कि०मी० की घाटीक्षेत्र में लगभग 100-150 अनुभवी एवं दक्ष बकरीपालकों को, सहकारी समितियों के माध्यम से चिन्हाकिंत करते हुए, बकरीपालकों को अधिकाधिक बकरियों का पालन कराये जाने हेतु प्रेरित करते हुए, बकरीपालन को आय के मुख्य साधन के रुप में (dedicated goat farming) बढावा दिया जाना है। वर्तमान समय में यह योजना विकासखण्ड सितारगंज में संचालित की जा रही है। पशुपालन विभाग एवं सहकारिता विभाग एवं रीप द्वारा वित्तपोषण एवं परस्पर अन्तर्विभागीय समन्वयन से प्रदेशभर में गोट वैली योजना का संचालन किया जा रहा है। योजना अन्तर्गत लाभार्थियों के चयन तथा ऋण वितरण/वसूली में सहकारिता विभाग सहकारिता विभाग (MPACS + Cooperative Banks) द्वारा तथा अनुदान, पशुधन बीमा हेतु टैंगिंग/स्वास्थ्य परीक्षण एवं पशुचिकित्सा, टीकाकरण तथा अन्य तकनीकी सेवाओं में पशुपालन विभाग द्वारा महत्वपूर्ण योगदान किया जाना अपेक्षित है। पशुपालन विभाग द्वारा इस योजना के तहत USGCF (Uttarakhand Sheep Goat Cooperative Federation) के माध्यम से 5.5 बकरियों हेतु रु॰30,000/- का लगभग 12% ब्याज पर ऋण तथा लगभग 90% अनुदान एवं 10% पशुपालक अंश योगदान पर 10 बकरयॉ एवं 01 बकरा उपलब्ध कराया जाता है।

3. ब्रायलर फार्म प्रोत्साहन योजना (Broiler Farm Promotion Scheme): वर्तमान में प्रदेश में 95% से अधिक मांस हेतु ब्रायलर मुर्गियॉ, पडोसी राज्यों (उत्तरप्रदेश, हरियाणा एव पंजाब) से आयातित होती हैं। पडोसी राज्यों में ब्रायलर कुक्कुट पालकों द्वारा बडे कुक्कुट फार्म स्थापित कर overhead cost में प्रभावी कमि, जलवायु की अनुकूलता तथा सस्ती दरों पर कुक्कुट आहार की सहज उपलब्धता के कारण, बहुधा उत्तराखण्ड राज्य के कुक्कुटपालक पडोसी राज्यों के कुक्कुटपालकों से प्रतियोगिता नही कर पाते हैं। गत वर्ष प्रदेश सरकार द्वारा पहली बार स्थानीय कुक्कुटपालकों द्वारा ब्रायलर फार्म्स को बढावा दिये जाने हेतु ग्रायलर फार्म प्रोत्साहन योजना प्रारम्भ की गयी। इस योजना के तहत 500 कुक्कुट पक्षी क्षमता वाले ब्रायलर फार्म यूनिट हेतु अपेक्षित व्यय रु०305ए000ध्. के सापेक्ष रु०60,000/- की का अनुदान अनुमन्य है। जिसमें च्वनसजतल ैीमक की स्थापना हेतु अपेक्षित व्यय भार रु०200000/- के सापेक्ष रु०15,000/- की प्रोत्साहन अनुदान राशि तथा 500-500 कुक्कुट पक्षियों के 06 बैच हेतु कुल रु०45,000/- का अनुदान दिये जाने का प्राविधान किया गया है।

4. पोल्ट्री वैली योजना (Poultry Valley Scheme): प्रदेशवासियों में देशी मुर्गी के मांस के प्रति विशेष रुचि को दृष्टिगत करते हुए शोध संस्थाओं द्वारा देशी मुर्गी के क्रास से Low Input Technology Kuroiler Birds की प्रजाति विकसित की गयी है। प्रदेश की ग्रामीण परिस्थिति में इन मुर्गियों को पाला जाना तुलनात्मक दृष्टि से आसान है तथा इनमें मृत्युदर भी कम है। प्रदेश में, पोल्ट्री वैली योजना पशुपालन विभाग एवं सहकारिता विभाग द्वारा वित्त पोषण एवं परस्पर समन्वयन से संचालित की जा रही है। योजना अन्तर्गत लाभार्थियों के चयन तथा ऋण वितरण/वसूली में सहकारिता विभाग (MPACS + Cooperative Banks) द्वारा तथा अनुदान एवं कुक्कुट चिकित्सा, टीकाकरण एवं अन्य तकनीकी सेवाओं हेतु पशुपालन विभाग द्वारा महत्वपूर्ण योगदान किया जाना अपेक्षित है। जनपद टिहरी गढवाल में इस योजना के तहत, विकासखण्ड नरेन्द्रनगर एवं चम्बा की 06 सहकारी समितियों (MPACS) (1. सहकारी समिति आमपाटा, 2. सहकारी समिति पोखरी, 3. सहकारी समिति सौण्डी, 4. सहकारी समिति मोरागढ, 5. सहकारी समिति गजा एवं 6. सहकारी समिति लवा) के 300 कुक्कुट पालकों को लाभान्वित किया जाना है। योजना के तहत 250 Kuroiler कुक्कुटपक्षी क्षमता वाली प्रत्येक क्रायलर यूनिट हेतु प्राविधानित प्रारम्भिक प्रोजेक्ट लागत रु०1ण्77 लाख की के सापेक्ष, पोल्ट्री शेड निर्माण, फीडर एवं अन्य उपकरण तथा विविध व्ययों को लाभार्थी द्वारा स्वयं के संसाधनों से योगदान किया जाना है अथवा सहकारिता विभाग की दीनदयाल उपाध्याय योजना के तहत ब्याजमुक्त ऋण के माध्यम से भी योगदान किया जा सकता है। सहकारिता विभाग के अन्तर्गत Apex Marketing Federation द्वारा पोल्ट्री वैली से उत्पादित देशी क्रायलर बर्ड्स के मांस को HIMALA Brand के तहत विपणन किया जाना है। पशुपालन विभाग द्वारा एक वर्ष में 250-250 Kuroiler Bird Month Old Chicks के कुल 03 बैच के सापेक्ष, पहले-पहले 02 बैच हेतु 100% अनुदान पर 250-250 Kuroiler Bird Month Old Chicks उपलब्ध कराये जाने हैं। इस क्रम में प्रति यूनिट कुल 500 Kuroiler Birds Month Old Chicks उपलब्ध कराये जाने हेतु रु०30/- per Kuroiler Bird Month Old Chick की दर से प्रत्येक लाभार्थी को कुल रु०15,000/- मात्र का अनुदान अनुमन्य है। जनपद टिहरी गढवाल अन्तर्गत समस्त Kuroiler Bird Month Old Chicks राजकीय कुक्कुट प्रक्षेत्र पशुलोक ऋषिकेश से क्रय किये जाने हैं।

5. गैरसरकारी गोकल्याण संस्थाओं एवं शहरी तथा ग्रामीण स्थानीय निकायों द्वारा निराश्रित परित्यक्त गोवंश को शरण दिये जाने हेतु गोशाला शरणालयों हेतु राजकीय अनुदान: मा० उच्च न्यायालय उत्तराखण्ड, नैनीताल द्वारा Cr. Misc. Appl. No.1526/2016 (पूजा बहुखण्डी बनाम उत्तराखण्ड राज्य) पर दिनांक 27-10-2016 को दिये गये आदेश तथा जनहित याचिका संख्या 112/2017 (अलीम बनाम उत्तराखण्ड राज्य) पर दिनांक 10-08-2018 को दिये गये आदेश के अनुरुप, निराश्रित गोवंश के प्रबन्धन हेतु ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों द्वारा तथा शहरी क्षेत्रों में नगर निकायों द्वारा कांजी हाउस गोशाला शरणालयों की स्थापना की जानी है। इस कार्य हेतु गैरसरकारी धर्मार्थ संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाना है। इस क्रम मे मुख्य सचिव, उत्तराखण्ड शासन स्तर से शासनादेश संख्या 1930 दिनांक 11.11.2016 एवं 1337 दिनांक 26.09.2022 केे अनुरुप शहरी विकास विभाग, पंचायतीराज/ग्राम विकास विभाग, पशुपालन विभाग, पुलिस विभाग तथा अन्य सभी सम्बन्धित विभागों हेतु निर्धारित दायित्वों के क्रम में दिशा-निर्देश दिये गये हैं तथा जिला अधिकारी महोदय की अध्यक्षता में जनपदीय गोआश्रय अनुश्रवण समिति, सचिव पशुपालन उत्तराखण्ड शासन की अध्यक्षता में अन्तर्विभागीय अनुश्रवण समिति एवं अपर मुख्य सचिव उत्तराखण्ड शासन स्तर पर शासन स्तरीय अनुश्रवण समिति का गठन किया गया है। शासनादेश संख्या 36254 दिनांक 26.06.2023 के अनुरुप आदर्श कार्यवाही प्रक्रिया का निर्धारण करते हुए, पंजीकृत गैरसरकारी पशुकल्याण संस्था के माध्यम से निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण हेतु रु०80ध्. प्रतिगोवंश प्रतिदिन भरण-पोषण अनुदान दरों का निर्धारण किया गया है। वर्तमान समय में गैरसरकारी पशु कल्याण संस्थाअरें द्वारा 05 स्थानों पर गोशाला शरणालयों का संचालन किया जा रहा है:-

क्र० संस्था का नाम शरणागत गोवंश की औसत संख्या
1 श्री राधे कृष्ण गौसदन ट्रस्ट बेरिया रोड बाजपुर 1221
2 श्री गौलोक धाम ग्राम कनकपुर 177
3 श्री कृष्ण प्रणामी महराजा अग्रसेन गौशाला ट्रस्ट, सितारगंज, 487
4 मॉ कामधेनु वात्सल्य सेवा धाम ट्रस्ट, बिरिया राइसमिल, स्थानान्तरित दिया/हल्दीघेरा-खटीमा अन्तरिम व्यवस्था 214
5 श्री राधे कृष्ण गौसदन ट्रस्ट गुलजारपुर (बाजपुर) अन्तरिम व्यवस्था 241
                                                   योग 2340

*वर्ष 2024 जुलाई में कामन नदी (शारदा की सहायक नदी) में बाढ आ जाने के कारण गोवंश की प्राणरक्षा हेतु ग्राम दिया में संचालित गोशाला शरणालय को निकटवर्ती ग्राम बिरिया में किराये पर ली गयी राइसमिल में संचालित किया जा रहा है।

* आदर्श कार्यवाही प्रक्रिया के क्रम में शासनादेश के अनुरुप, गोशाला शरणालय की निकटवर्ती प्रमुख नगर निकाय द्वारा
Hydraulic Cattle Catcher Van का उपार्जन किया जाना अपेक्षित है।
** ती नवीन गोशाला शरणालयों को निर्माण मद में बजट आबंटन सम्बन्धित प्रकरण शासन स्तर पर प्रक्रियाधीन है।

6. ग्राम्य गोसेवक योजना: उत्तराखण्ड शासन द्वारा नवीन पायलेट योजना के रुप में ग्राम्य गोसेवक योजना प्रारम्भ किये जाने का निर्णय लिया गया है। यह योजना राष्ट्रीय राजमार्गो तथा स्टेट हाइवे के निकट, ग्रामों में संचालित की जानी है। योजना के तहत ग्रामसभा खुली बैठक में, गोवंश की सेवा हेतु समर्पित, अनुभवी, सुयोग्य एवं 05 वयस्क नर गोवंशीय पशुओं को शरण दिये जाने के लिये गोशाला सुविधा दे पाने एवं भरण-पोषण में सक्षम आवेदक का चयन किया जाना है। चयनित ग्राम्य गो सेवक को अनुबन्ध के आधार पर रु०80ध्. प्रतिगोवंश प्रतिदिन की दर से गोवंश भरण-पोषण एवं प्रबन्धन अनुदान दिया जाना अनुमन्य है।

7. अनुसूचित जाति के लाभार्थियों हेतु गौपालन इकाई: इस योजना के तहत प्रत्येक विकासखण्ड में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कुछ लाभार्थियों हेतु 90ः अनुदान पर गाय यूनिट उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इस योजना के तहतSECC सूची के लाभार्थियों को प्राथमिकता दिये जाने का प्राविधान है। परियोजना लागत रु० 40ए000ध्. प्रति गाय के सापेक्ष लाभार्थी द्वारा रु० 4ए000ध्. प्रति गाय का योगदान किया जाता है तथा अनुदान अंश के रुप में रु० 36ए000ध्. दिये जाने का प्राविधान है। इस क्रम में लाभार्थी को पशुपालन मंत्रालय भारत सरकार के राष्ट्रीय पशुधन मिशन अन्तर्गत बीमा प्रीमियम पर 80ः अनुदान पर पशुधन बीमा की सुविधा भी उपलब्ध करायी जाती है। युगपतिकरण नीति के तहत ग्राम्य विकास विभाग द्वारा संचालित मनरेगा योजना के तहत स्थापित गौशाला प्राप्त करने वाले पशुपालक भी इस योजना से का लाभ ले सकते हैं। इस योजना हेतु अपुणी सरकार पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया जाना अपेक्षित है।
8. अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति हेतु भेड-बकरीपालन इकाई की स्थापना: इस योजना के तहत प्रत्येक विकासखण्ड में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कुछ लाभार्थियों हेतु भेड/बकरीपालन यूनिट हेतु, 90ः अनुदान पर 10 बकरियॉ एवं 01 बकरा उपलब्ध कराये जाने का प्रावधान है। इस योजना के तहत ैम्ब्ब् सूची के लाभार्थियों को प्राथमिकता दिये जाने का प्राविधान है। परियोजना लागत रु० 70ए000ध्. प्रति यूनिट के सापेक्ष लाभार्थी द्वारा रु० 7ए000ध्. का योगदान किया जाता है तथा अनुदान अंश के रुप में रु० 63ए000ध्. दिये जाने का प्राविधान है। इस क्रम में लाभार्थी को पशुपालन मंत्रालय भारत सरकार के राष्ट्रीय पशुधन मिशन अन्तर्गत बीमा प्रीमियम पर 80ः अनुदान पर पशुधन बीमा की सुविधा भी उपलब्ध करायी जाती है। युगपतिकरण नीति के तहत ग्राम्य विकास विभाग द्वारा संचालित मनरेगा योजना के तहत स्थापित मुर्गीबाडा प्राप्त करने वाले मुर्गीपालक भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं। इस योजना हेतु अपुणी सरकार पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया जाना अपेक्षित है।
9. महिला बकरी पालन इकाई की स्थापना: इस योजना के तहत योजनान्तर्गत गरीब, एकल, विधवा/ परित्यक्त/ तलाकशुदा महिला पशुपालकों को स्वरोजगार हेतु शतप्रतिशत अनुदान पर 03 बकरियॉ एवं 01 बकरा उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना के तहत प्रति यूनिट स्वीकृत लागत रु० 35ए000ध्. का प्राविधान है। इस क्रम में लाभार्थी को पशुपालन मंत्रालय भारत सरकार के राष्ट्रीय पशुधन मिशन अन्तर्गत बीमा प्रीमियम पर 60ः (for SCP/TSP) से 80ः (for General Category) अनुदान पर पशुधन बीमा की सुविधा भी उपलब्ध करायी जाती है।

जिला सैक्टर योजनाऐं

1. बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना (सामान्य जाति हेतु): इस योजना का मुख्य उद्देश्य छोटे निर्धन पशुपालकों को अन्य रोजगारपरक गतिविधियों (मनरेगा श्रमिक, मुर्गी, डेरी पशुपालन, बकरीपालन, कृषि, बागवानी, सब्जी उत्पादन इत्यादि) के साथ-साथ, सूक्ष्म स्तर देशी क्रायलर मुर्गीपालन को अपनाते हुए, घर के साथ ही बनाये गये छोटे कच्चे मुर्गीबाडे में बिना विशेष लागत, श्रम शक्ति नियोजन एवं प्रयासों के ही, आय का अतिरिक्त साधन अपनाने हेतु प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत पशुपालकों को निशुल्क 50.50 Kuroiler DOCS उपलब्ध करवाये जाने का प्राविधान किया गया है। सामान्य जाति के पशुपालकों को इस योजना के तहत Kuroiler Backyard Poultry Unit उपलब्ध कराये जाने हेतु लाभार्थी द्वारा Rs300/- प्रति यूनिट की दर से लाभार्थी अंश का योगदान किया जाता है।

2. बैकयार्ड कुक्कुट पालन (अनुसूचित जाति हेतु): इस योजना का मुख्य उद्देश्य अनुसूति जाति के छोटे निर्धन पशुपालकों को अन्य रोजगारपरक गतिविधियों (मनरेगा श्रमिक, मुर्गी, डेरी पशुपालन, बकरीपालन, कृषि, बागवानी, सब्जी उत्पादन इत्यादि) के साथ-साथ, सूक्ष्म स्तर देशी क्रायलर मुर्गीपालन को अपनाते हुए, घर के साथ ही बनाये गये छोटे कच्चे मुर्गीबाडे में बिना विशेष लागत, श्रम शक्ति नियोजन एवं प्रयासों के ही, आय का अतिरिक्त साधन अपनाने हेतु प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत पशुपालकों को निशुल्क 50.50 Kuroiler DOCS उपलब्ध करवाये जाने का प्राविधान किया गया है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के पशुपालकों को इस योजना के तहत Kuroiler Backyard Poultry Unit उपलब्ध कराये जाने हेतु लाभार्थी द्वारा Rs200/- प्रति यूनिट की दर से लाभार्थी अंश का योगदान किया जाता है।

3. जिला सैक्टर गोट वैली बकरीपालन की योजना: इस योजना के तहत 05 बकरियो प्रति यूनिट स्वीकृत लागत रु० 30000/- का प्राविधान है जिसमें लाभार्थी द्वारा रु०5000/- का योगदान किया जाता है तथा रु०30000/- अनुदान अंश प्रति यूनिट निर्धारित किया गया है।
4. चारा विकास: इस योजना के तहत पशुपालकों को निःशुल्क उन्नतशील चारा बीज वितरित करते हुए चारा उत्पादन हेतु प्रोत्साहित किया जाता है।