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राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा सरोजनी कैन्त्यूरा ने विकास भवन सभागार में जनपद के सरकारी एवं निजी षिक्षण संस्थानों के प्रबन्धकों एवं प्रधानाचार्याें के साथ चर्चा कर बालक-बालिकाओं की सुरक्षा विशय पर सुझाव प्राप्त करने के साथ ही आवष्यक दिषा निर्देष भी दिये।

Publish Date: 28-04-2017

रुद्रपुर 28 अप्रेल - राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा सरोजनी कैन्त्यूरा ने विकास भवन सभागार में जनपद के सरकारी एवं निजी षिक्षण संस्थानों के प्रबन्धकों एवं प्रधानाचार्याें के साथ चर्चा कर बालक-बालिकाओं की सुरक्षा विशय पर सुझाव प्राप्त करने के साथ ही आवष्यक दिषा निर्देष भी दिये। श्रीमती कैन्त्यूरा ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों के साथ हो रही अनैतिक घटनाओं को ध्यान में रखते हुए षिक्षण संस्थाओं द्वारा ऐसे कदम उठाये जाने आवष्यक हैं जिनमें बच्चों की सुरक्षा निहित हो। उन्होंने कहा कि बच्चें अपना अधिकांष समय विद्यालयों में ही व्यतीत करते हैं एसलिए जिस समयावधि में बच्चें विद्यालय में होते है उस समयावधि में बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी विद्यालय प्रबन्धन ही लें। उन्होंने कहा कि सभी षिक्षण संस्थानों में एक चाईल्ड वेल्फेयर कमेटी का गठन किया जाय जिसमें एक सदस्य विद्यालय से, एक काउन्सलर, एक अभिभावक संघ से और एक सदस्य पुलिस विभाग से बनाया जाय ताकि ये कमेटी बच्चों की समस्याओं का समाधान कर सकें। उन्होंने कहा कि अक्सर बच्चे विषेश रुप से बालिकाएं अपनी किसी समस्या के बारे में बताने में झिझकती हैं इसलिए विद्यालय में एक षिकायत पेटिका रखी जाये ताकि बच्चें लिखित रुप में अपनी षिकायत दर्ज कर सकें। उन्होनें कहा कि विद्यालयों में षौचालय के बाहर, विद्यालय के गेट एवं मुख्य स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगायें जायें। उन्होंने कहा कि अक्सर विद्यालय आगमन समय की समाप्ति पर विद्यालयों द्वारा गेट बन्द कर दिये जाते हैं और बच्चों को विद्यालय में प्रवेष नहीं करने दिया जाता है और बच्चें ईधर उधर घूमने निकल जाते हैं और बच्चों के साथ अनैतिक घटनाएं घटित होती हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय में देरी से पहुंचने वाले बच्चों को भी विद्यालय में प्रवेष करने दिया जाय ताकि वे ईधर उधर घूमने न निकलें। उन्होंने कहा कि बच्चों को नैतिक षिक्षा देने के लिए 30 मिनट का एक अलग पीरियड रखा जाय ताकि बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित हों। श्रीमती कैन्तयूरा ने कहा कि विद्यालयों में रखे जाने वाले गेट कीपर, माली, अनुसेवक आदि की नियुक्ती उसके बैक ग्राउण्ड की पूरी जानकारी लेने के बाद व पुलिस वेरिफिकेषन के बाद ही की जाय। उन्होंने कहा कि कक्षा 01 से 05 तक के बच्चों को महिला अध्यापिकाओं द्वारा ही पढाया जाय। विद्यालय में बच्चों का मोबाईल व मोटरसाईकिल लेकर आना प्रतिबन्धित किया जाय ताकि बच्चों में मंहगें-मंहगें मोबाईल व मोटर साईकिल खरीदने की प्रतिस्पद्र्धा व दुर्पपयोग पर लगाम लगायी जा सके। साथ ही उन्होनें पुलिस व चिकित्सा विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों से पीडित बच्चों के साथ सहयोगात्मक रवैया अपनाते हुए मदद व उपचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बच्चा किसी एक का नहीं होता पूरे समाज का होता है और बच्चे की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी पूरे समाज की ही होनी चाहिए। अन्त में श्रीमती कैन्त्यूरा ने कहा कि राज्य महिला आयोग हर महिला व पुरुश के साथ खडा है। यदि किसी की कोई समस्या होगी तो उसका हरसम्भव समाधान किया जायेगा। 

  बैठक में उपस्थित प्रबन्धकों, प्रधानाचार्यों एवं षिक्षकों द्वारा भी बच्चों की सुरक्षा के बावत महत्वपूर्ण सुझाव दिये गये। 

     बैठक में मुख्य विकास अधिकारी आलोक कुमार पाण्डेय, सदस्य सचिव राज्य महिला आयोग रमन्द्रिी मन्द्रवाल, जिला षिक्षा अधिकारी सुभागा आर्या व डीसी सती, सीओ सीटी हिमांषु षाह, सदस्य राज्य महिला आयोग अफषा मलिक सहित जनपद के विभन्न षिक्षण संस्थानों के प्रबन्धक व प्रधानाचार्य उपस्थित थे।